आगरा में एक भी अनफिट स्कूली वाहन नहीं चलना चाहिए, डीएम की चेतावनी
11 दिन में 140 स्कूली वाहनों के चालान, 37 वाहन पूरी तरह बंद; सुबह स्कूल खुलने के समय चलेगा विशेष चेकिंग अभियान
आगरा। बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आगरा में एक भी अनफिट या नियमों का उल्लंघन करने वाला स्कूली वाहन संचालित नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को अनफिट स्कूली वाहनों के खिलाफ तत्काल और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
प्रदेश में 11 अगस्त से 25 अगस्त तक ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत स्कूलों के अनधिकृत और अनफिट वाहनों की फिटनेस, परमिट, आयु, चालक की पात्रता तथा सुरक्षा मानकों की जांच की जा रही है। आगरा में भी परिवहन विभाग की टीम लगातार अभियान चलाकर स्कूली वाहनों की जांच कर रही है।
शुक्रवार को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला विद्यालय यान परिवहन सुरक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में अभियान की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि जनपद में 412 स्कूलों के नाम पर कुल 1421 वाहन पंजीकृत हैं। अभियान के दौरान 11 अगस्त से 21 अगस्त तक 140 स्कूली वाहनों के चालान किए गए हैं, जबकि 37 वाहनों का संचालन पूरी तरह बंद कराया गया है।
इसके अलावा 10 अगस्त की सूची के अनुसार जिले में 79 वाहन अनफिट पाए गए थे। इनमें से 7 वाहनों की फिटनेस पूरी हो चुकी है, जबकि 72 वाहनों का सत्यापन अभी लंबित है। इस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिए कि लंबित वाहनों का सिर्फ कागजों के आधार पर सत्यापन न किया जाए, बल्कि परिवहन विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर प्रत्येक वाहन का भौतिक सत्यापन करे।
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक वाहन के संबंध में स्पष्ट जानकारी जुटाई जाए कि वह वर्तमान में संचालित है, मौके पर खड़ा है अथवा स्क्रैप हो चुका है। यदि कोई अनफिट वाहन बच्चों को ढोता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए। उन्होंने सत्यापन का कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा कर अगली बैठक में वाहनवार स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
बच्चों की सुरक्षा में कोई लापरवाही नहीं
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय संचालकों से भी संवाद किया और निजी वैन से विद्यालय आने-जाने वाले विद्यार्थियों की व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिभावकों का समूह यदि बच्चों के आवागमन के लिए किसी वाहन की व्यवस्था करता है, तब भी उस वाहन का नियमों के अनुरूप पंजीकृत, फिट और सुरक्षित होना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंधन को ऐसे वाहनों की जानकारी होने पर उन्हें वैधानिक प्रक्रिया पूरी कराने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सभी विद्यालयों को नियम 222-ख का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। बच्चों को लाने-ले जाने वाली बस, वैन अथवा अभिभावकों के समूह द्वारा अनुबंधित वाहन की फिटनेस, निर्धारित आयु, क्षमता और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से कराया जाए।
सुबह स्कूल खुलने के समय होगी विशेष चेकिंग
जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विद्यालयवार वाहनों की संख्या, फिट और अनफिट वाहनों तथा भौतिक सत्यापन की स्थिति का पूरा विवरण तैयार किया जाए। सत्यापित चालकों की सूची में चालक का नाम, वाहन संख्या, विद्यालय और सत्यापन की स्थिति स्पष्ट रूप से दर्ज की जाए।
इसके साथ ही चालान और सीज किए गए वाहनों का विद्यालयवार तथा वाहनवार विवरण भी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से कहा कि बच्चों को विद्यालय लाने-ले जाने वाले वाहनों की जांच के लिए सुबह स्कूल खुलने के समय विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया जाए।
बिना फिटनेस के बच्चों को ले जाते हुए कोई वाहन मिला तो उसके खिलाफ तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का साफ संदेश है कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और अनफिट स्कूली वाहनों के संचालन पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित की जाएगी।