फर्जी दानपत्र बनाकर संपत्ति हड़पने का आरोप, पिनाहट पुलिस ने गवाह को किया गिरफ्तार - समाचार RIGHT

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गुरुवार, 13 अगस्त 2026

फर्जी दानपत्र बनाकर संपत्ति हड़पने का आरोप, पिनाहट पुलिस ने गवाह को किया गिरफ्तार

फर्जी दानपत्र बनाकर संपत्ति हड़पने का आरोप, पिनाहट पुलिस ने गवाह को किया गिरफ्तार

आगरा। पूर्व मंत्री राजा अरिदमन सिंह भदावर की पिनाहट स्थित संपत्तियों में से एक दुकान को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि दुकान के किराएदार दिनेश कुमार गुप्ता ने स्वयं को संपत्ति का मालिक बताते हुए कूटरचित दस्तावेज तैयार किए और दुकान का दानपत्र अपने बेटे राजीव कुमार के नाम कर दिया। मामले में दानपत्र पर गवाह के रूप में हस्ताक्षर करने वाले शादाब हुसैन को पिनाहट पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

जानकारी के मुताबिक, संबंधित दुकान राजा अरिदमन सिंह भदावर की संपत्ति बताई जा रही है। दिनेश कुमार गुप्ता लंबे समय से इस दुकान का किराएदार के रूप में उपयोग कर रहा था। आरोप है कि उसने किराएदार होने के बावजूद खुद को दुकान का मालिक दर्शाते हुए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर दुकान का दानपत्र अपने बेटे राजीव कुमार के नाम करने का प्रयास किया गया।

बताया गया है कि कथित दानपत्र में शादाब हुसैन पुत्र जफर हुसैन, निवासी मोहल्ला सुनरट्टी, बाह, आगरा ने गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए थे। संपत्ति से संबंधित कथित फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने के बाद पूर्व मंत्री की किराए की संपत्तियों की देखरेख करने वाले केयरटेकर की ओर से थाना पिनाहट में मुकदमा दर्ज कराया गया।

मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। इसी क्रम में पिनाहट पुलिस टीम ने चेकिंग के दौरान कथित फर्जी दानपत्र में गवाही देने वाले शादाब हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित कूटरचित दस्तावेज कैसे तैयार किए गए और दानपत्र की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।

मामले में दिनेश कुमार गुप्ता और उसके बेटे राजीव कुमार की भूमिका भी पुलिस की जांच के दायरे में है। पुलिस संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों, दानपत्र तैयार कराने की प्रक्रिया और उसमें इस्तेमाल किए गए कागजात की सत्यता की जांच कर रही है। साथ ही दुकान के वास्तविक स्वामित्व और दिनेश कुमार गुप्ता की किरायेदारी से संबंधित दस्तावेजों को भी जांच में शामिल किया गया है।

पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जीवाड़े में किसकी क्या भूमिका रही और संपत्ति के संबंध में तैयार किए गए दस्तावेज वास्तव में कूटरचित थे या नहीं।

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