दिल में छेद से जूझ रही मासूम लविश्का को मिला नया जीवन, RBSK बना वरदान - समाचार RIGHT

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बुधवार, 19 अगस्त 2026

दिल में छेद से जूझ रही मासूम लविश्का को मिला नया जीवन, RBSK बना वरदान

दिल में छेद से जूझ रही मासूम लविश्का को मिला नया जीवन, RBSK बना वरदान

आगरा:- आर्थिक तंगी के कारण बेटी के इलाज को लेकर परेशान पिता के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) उम्मीद की किरण बनकर सामने आया। विकासखंड अछनेरा के ग्राम साधन निवासी गजेंद्र पाल सिंह की नन्हीं बेटी लविश्का जन्मजात हृदय रोग से जूझ रही थी। निजी अस्पतालों में इलाज का भारी खर्च परिवार की आर्थिक क्षमता से बाहर था। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके टीम ने बच्ची को उपचार की राह दिखाई और आखिरकार उसकी सफल ओपन हार्ट सर्जरी कराकर उसे नया जीवन दिलाया।

आशा कार्यकर्ता से सूचना मिलने के बाद अछनेरा ब्लॉक की आरबीएसके टीम-बी में शामिल डॉ. लता मिश्रा, डॉ. दीप्ति बरूण, संतोष कुमार और अनीता कौशिक ने गांव पहुंचकर लविश्का की जांच की। टीम ने परिजनों को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत मिलने वाली निशुल्क उपचार सुविधाओं की जानकारी दी।

इसके बाद डीईआईसी मैनेजर रमाकान्त शर्मा के समन्वय से बच्ची को जेएन मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में संदर्भित किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने 30 जुलाई 2026 को लविश्का की सफल ओपन हार्ट सर्जरी की। इलाज, ऑपरेशन और दवाइयों का पूरा खर्च सरकार की ओर से वहन किया गया।

बेटी के सफल इलाज के बाद पिता गजेंद्र पाल सिंह भावुक हो उठे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग और आरबीएसके टीम का आभार जताते हुए कहा कि योजना ने उनकी बेटी को नई जिंदगी देने का काम किया है।

47 गंभीर बीमारियों का निशुल्क उपचार

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित महत्वपूर्ण योजना है। इसके अंतर्गत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात दोष, कमियां, बीमारियां तथा विकास में देरी एवं दिव्यांगता जैसी चार प्रमुख श्रेणियों में शामिल 47 गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की स्क्रीनिंग की जाती है। चिन्हित बच्चों को आवश्यकता के अनुसार उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर कर निशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है।

दो वर्षों में 228 बच्चों का सफल उपचार

जनपद आगरा में आरबीएसके के माध्यम से बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का अभियान लगातार जारी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार वर्ष 2025-26 में 152 तथा वर्ष 2026-27 में अब तक 76 गंभीर रूप से पीड़ित बच्चों का सफल उपचार कराया जा चुका है। इस तरह दो वर्षों में अब तक 228 बच्चों को उपचार के माध्यम से नई जिंदगी मिली है।

अधिकारियों ने बताया योजना का महत्व

डॉ. अरुण श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, आगरा ने कहा कि आरबीएसके के तहत 47 बीमारियों की जांच के साथ संपूर्ण उपचार और दवाइयों का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाता है।

डॉ. सुरेंद्र मोहन प्रजापति, नोडल अधिकारी आरबीएसके ने बताया कि आरबीएसके की टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की लगातार स्क्रीनिंग करती हैं। जांच के दौरान गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों को चिन्हित कर उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर किया जाता है।

रमाकान्त शर्मा, डीईआईसी मैनेजर, आगरा ने कहा कि जनपद में अब तक 228 बच्चों को समय पर रेफरल और बेहतर उपचार प्रबंधन के जरिए नई जिंदगी मिल चुकी है।

लविश्का की कहानी इस बात की मिसाल है कि समय पर पहचान, उचित रेफरल और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ मिल जाए तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गंभीर बीमारियों से लड़कर स्वस्थ जीवन की राह मिल सकती है।

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