यूजीसी के विरोध में सड़क पर उतरे हजारों युवा, ट्रैक्टर मार्च रोकने पर पुलिस से भिड़ंत
एत्मादपुर के संवई में 200 मीटर आगे बढ़ते ही पुलिस ने रोका रास्ता, नोकझोंक के बाद धक्का-मुक्की; कालिंदी विहार में भी डेढ़ घंटे प्रदर्शन से लगा जाम
आगरा। यूजीसी की नई व्यवस्था के विरोध में शुक्रवार को आगरा में प्रदर्शन और पुलिस-प्रशासन की सख्ती का असर कई इलाकों में दिखाई दिया। एत्मादपुर के संवई गांव से कलेक्ट्रेट तक प्रस्तावित ट्रैक्टर मार्च को लेकर सुबह से ही पुलिस और पीएसी तैनात रही। गांव से करीब 200 मीटर आगे बढ़े करीब एक हजार प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। कलेक्ट्रेट जाने की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच पहले तीखी नोकझोंक हुई और फिर धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे की ओर खदेड़ दिया। दोपहर तक मौके पर दोनों पक्ष आमने-सामने डटे रहे और सड़क किनारे बड़ी संख्या में ट्रैक्टर खड़े रहे।
सिस्टम सुधार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशुमान ठाकुर के नेतृत्व में संवई से कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च का ऐलान किया गया था। आंदोलन को भारतीय किसान यूनियन भानु समेत क्षत्रिय समाज के कुछ पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों का समर्थन मिला था। हालांकि गुरुवार को कई समर्थकों ने युवाओं के भविष्य और पूर्व आंदोलनों में दर्ज मुकदमों का हवाला देते हुए आंदोलन से दूरी बनाने की अपील की। भारतीय किसान यूनियन भानु ने भी कार्यक्रम स्थगित करने की घोषणा की थी। इसके बावजूद अंशुमान ठाकुर ने आंदोलन जारी रखने और ट्रैक्टर मार्च निकालने की बात कही।
रात से ही गांवों में पुलिस ने शुरू किया संपर्क
प्रस्तावित मार्च को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने गुरुवार से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। पुलिस टीमों ने आसपास के गांवों में लोगों से संवाद किया और प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने की अपील की। शुक्रवार तड़के करीब चार बजे से पुलिस की सक्रियता और बढ़ा दी गई। संवेदनशील स्थानों पर पीएसी तैनात करने के साथ ही प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई।
200 मीटर आगे बढ़ते ही रोका मार्च
शुक्रवार सुबह संवई गांव से बड़ी संख्या में युवा ट्रैक्टरों के साथ आगरा की ओर बढ़े। गांव से करीब 200 मीटर आगे पहुंचते ही पहले से तैनात पुलिस और पीएसी ने बैरियर लगाकर रास्ता रोक दिया। ट्रैक्टरों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए क्रेन भी लगाई गई थी। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट जाने की मांग की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी।
इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। कुछ देर बाद स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को पीछे की ओर खदेड़ दिया। हालांकि कुछ समय बाद प्रदर्शनकारी दोबारा एकजुट होने लगे। सड़क किनारे बड़ी संख्या में ट्रैक्टर खड़े रहे और पुलिस बल मौके पर तैनात रहा।
एत्मादपुर से रामबाग तक पुलिस की निगरानी
प्रदर्शन को देखते हुए एत्मादपुर, कुबेरपुर और रामबाग समेत कई प्रमुख मार्गों पर पुलिस बल तैनात किया गया। आंवलखेड़ा और बरहन की तरफ से आने वाले रास्तों पर भी निगरानी बढ़ाई गई। संवेदनशील स्थानों पर पीएसी के जवान तैनात रहे और ड्रोन से निगरानी की गई। डीसीपी वेस्ट आदित्य कुमार भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। एहतियात के तौर पर कुछ किसान नेताओं को घरों में नजरबंद किए जाने की भी जानकारी सामने आई।
कालिंदी विहार में भी यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन
उधर, कालिंदी विहार क्षेत्र में भी शुक्रवार सुबह यूजीसी की नई व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन हुआ। सीएनजी पंप के पीछे करीब 10:30 बजे करणी सेना के प्रदेश महामंत्री दिनेश जादौन के नेतृत्व में लोग सड़क पर उतर आए। करीब डेढ़ घंटे चले प्रदर्शन के दौरान सड़क पर जाम की स्थिति बन गई और यातायात प्रभावित रहा। प्रदर्शन में युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर यूजीसी की व्यवस्था वापस लेने की मांग की और नारेबाजी की।
सूचना पर ट्रांस यमुना थाना पुलिस मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों से सड़क खाली करने की अपील की। करीब 12 बजे प्रदर्शनकारी वापस लौट गए, जिसके बाद यातायात सामान्य कराया गया। प्रदर्शन में करणी सेना के युवा प्रदेश अध्यक्ष करण ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गेश सिसोदिया समेत कई लोग मौजूद रहे।
युवाओं के भविष्य को लेकर पहले ही हुई थी बैठक
ट्रैक्टर मार्च से एक दिन पहले गुरुवार को फतेहाबाद रोड पर क्षत्रिय समाज और युवाओं के भविष्य को लेकर बैठक हुई थी। इसमें वक्ताओं ने पूर्व के आंदोलनों में युवाओं पर दर्ज मुकदमों का हवाला देते हुए नए आंदोलन में शामिल होने से पहले उसके परिणामों और नेतृत्व की जवाबदेही पर विचार करने की अपील की।
क्षत्रिय महासभा के राष्ट्रीय महासचिव गौरी शंकर सिकरवार ने कहा कि समाज और नौजवानों के भविष्य को सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आंदोलनों में शामिल होने वाले युवाओं और उनके परिवारों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। वहीं क्षत्रिय राजपूत महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर दिलीप सिंह चौहान ने कहा कि जनहित के मुद्दों पर विरोध का अधिकार है, लेकिन युवाओं को किसी की व्यक्तिगत राजनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
शुक्रवार को संवई और कालिंदी विहार में हुए प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी। प्रशासन की प्राथमिकता प्रदर्शन के दौरान यातायात और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना रही।