12वीं पास वीरू का शातिर खेल: डीजीपी के पीआरओ का दोस्त बनकर बेरोजगारों को फंसाया, नौकरी के नाम पर सवा करोड़ से ज्यादा ठगे
रहने-सहने और अफसरों से नजदीकी का रौब दिखाकर बनाता था भरोसा, फर्जी रिजल्ट की पीडीएफ भेजकर करता था ठगी; आठ पीड़ितों से रकम ऐंठने का पुलिस के सामने किया खुलासा
आगरा। नौकरी की तलाश में भटक रहे बेरोजगार युवाओं को अपने जाल में फंसाकर लाखों रुपये ऐंठने वाले शातिर ठग का साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। 12वीं पास आरोपी वीरू खुद को समाजसेवी बताने के साथ अधिकारियों से नजदीकी और डीजीपी के पीआरओ का करीबी दोस्त होने का दावा कर लोगों पर रौब जमाता था। नौकरी लगवाने और परीक्षा में सेटिंग कराने का झांसा देकर वह बेरोजगारों से मोटी रकम वसूलता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आठ लोगों से सवा करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करना स्वीकार किया है।
शिक्षिका के बेटे को नौकरी दिलाने का झांसा
सदर के मुस्तफा क्वार्टर निवासी अरविंद सक्सेना ने पुलिस को बताया कि उनकी पत्नी सरकारी शिक्षिका हैं। कुछ समय पहले बीएलओ ड्यूटी के दौरान उनकी मुलाकात रोहता में रहने वाले वीरू से हुई थी। आरोपी ने खुद को समाजसेवी बताया और दावा किया कि लखनऊ में उसके अधिकारियों से अच्छे संबंध हैं। उसने खुद को यूपी डीजीपी के पीआरओ का करीबी दोस्त बताते हुए शिक्षिका के बेटे को पुलिस विभाग में लिपिक के पद पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।
आरोपी ने परीक्षा में सेटिंग कराने के नाम पर 13.25 लाख रुपये ले लिए। पीड़ित का भरोसा मजबूत करने के लिए उसने अपने साथी राज शर्मा से भी डीजीपी के पीआरओ के रूप में फोन पर बातचीत कराई। इसके बाद आरोपी ने व्हाट्सऐप पर परीक्षा परिणाम की एक पीडीएफ भी भेजी, जिसे देखकर पीड़ितों को लगा कि उनका काम हो गया है। बाद में जांच में वह पीडीएफ फर्जी निकली।
रौबदार अंदाज और अफसरों से संबंधों का दिखाता था झांसा
पुलिस के मुताबिक वीरू बेरोजगार युवाओं और उनके परिजनों को अपने निशाने पर लेता था। वह खुद को प्रभावशाली बताने के लिए अधिकारियों से संबंध होने का दावा करता और अपने रहन-सहन के जरिए लोगों पर प्रभाव डालता था। बातचीत के दौरान वह इस तरह भरोसा पैदा करता कि सामने वाला उसकी बातों पर आसानी से विश्वास कर लेता था। इसके बाद नौकरी लगवाने या परीक्षा में चयन कराने के नाम पर मोटी रकम मांगता था।
शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी वीरू को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पुलिस के अनुसार उसने उत्तर प्रदेश और राजस्थान में आठ बेरोजगारों से सवा करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने की बात स्वीकार की है।
साथी की तलाश में जुटी पुलिस
पुलिस अब आरोपी के साथ जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। खासतौर पर राज शर्मा समेत उन लोगों की तलाश की जा रही है, जिनके जरिए आरोपी अपने शिकार का भरोसा जीतता था। पुलिस ठगी की रकम के लेनदेन और आरोपी के संपर्क में रहे अन्य लोगों की भी जानकारी जुटा रही है।
पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस अब आरोपी के नेटवर्क और उसके द्वारा ठगी के शिकार बनाए गए अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटाने में लगी है। अदालत के आदेश पर आरोपी को जेल भेज दिया गया है।