विरोध प्रदर्शन की आड़ में बढ़ती अराजकता लोकतंत्र के लिए खतरा : के.के. भारद्वाज - समाचार RIGHT

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गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

विरोध प्रदर्शन की आड़ में बढ़ती अराजकता लोकतंत्र के लिए खतरा : के.के. भारद्वाज

विरोध प्रदर्शन की आड़ में बढ़ती अराजकता लोकतंत्र के लिए खतरा : के.के. भारद्वाज

भाजपा नेता बोले- संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना अधिकार, लेकिन आरोप प्रमाण और तथ्यों के साथ होने चाहिए

आगरा। भाजपा नेता के.के. भारद्वाज ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार संविधान की मूल भावना का हिस्सा है, लेकिन विरोध की आड़ में संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना, दबाव बनाने का प्रयास करना अथवा व्यक्तिगत स्तर पर निशाना साधना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

उन्होंने दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस तथ्यों और प्रमाणों के बजाय राजनीतिक दबाव की राजनीति कर रही है। उन्होंने आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए प्रदर्शन, नारेबाजी और दीवारों तथा गेट पर कथित आपत्तिजनक लेखन का भी जिक्र किया।

के.के. भारद्वाज ने कहा कि निर्वाचन आयोग देश की संवैधानिक संस्था है और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, उनके मुताबिक सवाल ठोस तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर उठाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना पर्याप्त तथ्य के लगातार अविश्वास का माहौल बनाने से निर्वाचन आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता के साथ-साथ मतदाताओं के जनादेश को लेकर भी लोगों के बीच संदेह पैदा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े नेताओं का नाम लेने वालों को उनके बताए सत्य, संयम, नैतिकता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को भी अपने आचरण में उतारना चाहिए। लोकतंत्र केवल नारों और दबाव से नहीं, बल्कि संविधान, तथ्यों और जनविश्वास से मजबूत होता है।

भाजपा नेता ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति के लिए पर्याप्त स्थान है, लेकिन विरोध का स्वरूप शांतिपूर्ण और मर्यादित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर अपनी बात रखें।

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